सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन से जिजाऊ माता (शिवाजी महाराज की मां )के
जन्मदिन तक दस दिवसीय जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है . नारे लगाते हुए
,नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जोर शोर से कार्यक्रम की शुरुआत अपने अपने तरीके
से की जाती है .बोरखेडी व मोताला{बुलडाना } में विगत पन्द्रह वर्ष से
जन्मोत्सव का आयोजन लेखिका ,कवयित्री व प्राचार्य के नेतृत्व में किया
जाता है .इस बार का आयोजान दामिनी को समर्पित किया गया है .दामिनी की
जीवटता ,जीने के भरपूर हौसले और बलात्कारियों से जी-जान से लड़ने के जज्बे
को स्त्री ताकत का प्रतीक माना गया .वह मरते दम तक जीना चाहती थी ,उस चाहत
को सलाम .सावित्रीबाई ने पढ़ना लिखना सिखा और लड़कियों की पहली शाला खुलवाने में पति की सहयोगी बनकर पहली महिला शिक्षिका बनी .