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Wednesday, January 2, 2013

सावित्री-जिजाऊ जन्मोत्सव {3जनवरी से 12जनवरी }

सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन से जिजाऊ माता (शिवाजी महाराज की मां )के जन्मदिन तक दस दिवसीय जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है . नारे लगाते हुए ,नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जोर शोर से कार्यक्रम की शुरुआत अपने अपने तरीके से की जाती है .बोरखेडी व मोताला{बुलडाना } में विगत पन्द्रह वर्ष से जन्मोत्सव का आयोजन  लेखिका ,कवयित्री व प्राचार्य के नेतृत्व में किया जाता है .इस बार का आयोजान दामिनी को समर्पित किया गया है .दामिनी की जीवटता ,जीने के भरपूर हौसले और बलात्कारियों से जी-जान से लड़ने के जज्बे को स्त्री ताकत का प्रतीक माना गया .वह मरते दम तक जीना चाहती थी ,उस चाहत को सलाम .
सावित्रीबाई ने पढ़ना लिखना सिखा और लड़कियों की पहली शाला खुलवाने में पति की सहयोगी बनकर पहली महिला शिक्षिका बनी .

झोपड़पट्टी के मासूम फूलों का झुंड

                     जिंदगी,झोपडपट्टी की अंधेरी संकरी गलियों में कदम तोड़ देती है और किसी को   भी पता नहीं चलता है।जीवन जिसके मायने किसी को भ...