..................................................................................... कैलाश वानखेड़े
Monday, February 18, 2019
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झोपड़पट्टी के मासूम फूलों का झुंड
जिंदगी,झोपडपट्टी की अंधेरी संकरी गलियों में कदम तोड़ देती है और किसी को भी पता नहीं चलता है।जीवन जिसके मायने किसी को भ...
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कहानी ''सत्यापित ''को सुना जा सकता है ,रेडियों की दुनिया के सरताज ,युनूस खान की आवाज में .यहाँ क्लिक कीजिये ..... http:...
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मेरे माथे पर नहीं लिखा है लेकिन मेरा चेहरा बोलता है बोलते है घुसर फुसुर करते हुए सैकड़ों मुहँ धारी पढ़ लेते है कागजात पता लगा लेते है ...
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---- कैलाश वानखेड़े जल रही है आँख अभी जबकि पढ़ नहीं पाया पूरा अखबार कि फेसबुक...

1 comment:
पुस्तक के संकलन में मानव पीड़ा एवम आत्म बल पर जोर दिया गया है।साधुवाद कैलाशजी
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