खापा

   कहानी : कैलाश वानखेड़े 


सभीको दिखती है दूर से अमराई.गांव वाले हो या शहर के बाशिन्‍दे  किसी से भी पूछा जाये तो वह इसे शहर की सीमा से बाहर बतायेगा लेकिन अमराई शहर की सीमा के भीतर है. मोटी किताबों के रखवाले कहते है,लोगों का क्‍या हैउन्हें कुछ आता जाता नहीं इसलिए उन्हें मालूम नहीं.मालूम नहीं ,इस बात को इतनी बार बोला-लिखा गया कि मालूम नहीं .अमराई के पास आने के बाद दूर-दूर तक विरान जमीन दिखती है जिसे  खेत कहा जाता है.विरान खेतों को खरीद लिया गया हैखरीदी हुई विरान होती है.खेत विरान करने के बाद कॉलोनी आबाद होती है.अमराई से लगा सडक के पास खडा दिखता है आम का ठेलाठेलें के साथ होता है एक बुढा.जब नहीं दिखता बुढा तो दिखतीहै बुढिया तब होती है साथ में एक लडकी आठ-दस साल कीजो बकरियों के साथखेलती दिखती है.दिखतें है ढेर सारे आम के अलावा जामुन से आधी भरी टोकरी.खाली हिस्‍से के जामुन को जामुनों का शिखर बनाने के लिए जमाये हैएक के उपर ताकि दिखे दूर से ही कि ये जामुन है.शिखर दिखाने के लिए ही बनाये जाते है .जामुन पहचान लेऔर जबान खराब होने के डर को छोडकर खरीद ले. यहॉ जामुन के पेड़ नहीं है. पेड़ है आम केहर पेड़ पर आम.अमराई की तरह होता होगा प्राइवेट स्कूल जहाँ घनी ठंडी छाया तले खूब खेलने -पढने के बाद पेड़ पर चढ़कर आम जामुन खाने को मिलता होगा.समर के दिमाग में स्कूल के साथ साथ आम चला आया .


           
     समर रोज रोज नहीं आता इस रास्‍ते पर लेकिन हफ्तें मे एकाध बार चक्‍कर लग ही जाता है .यही इसी जगह आम देखकरभीतर इच्‍छा का बीज अंकुरीत होकरतेजी से बढताझूमता और कहता हैबच्‍चों के लिए आम खरीद ले.पेड़ के पास रूकने का मन होता है. मनजिस पर हमेशा तन भारी पडता है.मन दिखता नहीं. दिखता नहीं हैख़याल की तरह . ख़याल आने के बाद समर का हाथ जेब के भीतर जाता है और पैर तेजी से पैडिल मारते हुए तेज चलाने लगता है. पत्‍थरों से बचता बचाता समर निकालता है साइकिल .नु‍किले,तेज,सभी साईज के पत्‍थर बिखरें पडे हैवे पंचर न कर दे इसलिए उनसे बचाता है  जीवन को गति देने वाली साइकिल के पहिये को. पहिये को बचाने के अलावा साइकिल को और सच कहे तो खुद को बचाना है.सामने सेपीछे से ट्रक के आने जाने से गति कम हो जाती हैयहां तेज और गति के मायने बदल जाते है. धीमी गति को तेज और लगभग रूक गए को कम स्‍पीड मानने से सफर में है,देश में है का अहसास होता है. सडक किनारे सडक को छूती हुई जमीन होती हैउस छोर तक अपने लिए रास्‍ता ढूंढता है. ट्रक के नीचे आने की बजाय अपनी साइकिल से खेत की तरफ गिर जाने में भलाई समझता है समर. ट्रक से मरने की बात से लगता है हत्‍यारा निकला है सडकों परतीखीकर्कश आवाज में चीखता चिल्‍लाता हुआतभी तेज आवाज में सुनाई देता हैढिंक चिका ढिंक चिकाढिंक चिक... बारह महिनों में बारह तरीके से तुझको प्‍यार जताउंगा रे मैं ढिंक चिका ढिंक चिका...
        
    साइकिल चलाते हुए सुनता है तो वह बारह तरीके सोचने लगता है जबकि कामसूत्र में 64 प्रकार में से 24 आसन संबंधी हैउससे घटकर बारह पर आ गए है. घट गएकम हो गएमंदी का असरमुद्रास्फीति….. मतलब ये मुद्दा  बनसकता है. इस मुद्दे  पर टीवी पर चर्चा हो सकती है प्राइम टाइम पर. यह सनसनीखेज समाचार और तीखी बहस का विषय हो सकता है. सरकार की नाकामी कही जा सकती है. महान संस्‍क़ति वाले देश में सिर्फ बारह तरीके रह गए है. ऋषिमुनियों द्धारा बताये गए तरीकों का संरक्षण कर पानें में असफल रही सरकार.संस्‍क़ति विरोधी है.प्रेशर हार्न के बजते ही समर को लगता है हत्‍यारे से बचने के बारह तरीके भी नहीं होते है और वह साइकिल से उतर जाता है. जान बचाने के लिए पसीने से तर बतर बदन के साथ पैदल चलने लगता है. घर जाना है.घर नहीं जाना चाहिए और वह विपरीत दिशा में मुड जाता है .
       
     आम खरीदनें हैसोचता है लेकिन आम के दाम का आंकड़ा  सोचने का काम छुडवा देता है. सोचना अच्‍छी चीज नहीं मानी जाती है. फिर भी सोचता है क्‍योंकि कुछेक दिन बाद बरसात आयेगी तो ये आम भी मिल नहीं पायेगें और पता नहीं अगले आठ दस दिन में इधर चक्‍कर लग पायेगा या नहीं. पेडों पर झूलते आम और बच्‍चों के चेहरे दोनों मिलते है और पीछे मुड़कर  आम के ठेलें के पास खडा हो जाता है. ठेले के पास टिकी है दो बाइक.  आठेक आदमी वही खड़े-खड़े आम खा रहे है .तौल रहा है बुढा ,आम .आम छांटते है लोग .छांटने वाले से कहता
है बुढा ,‘’कोई से भी ले लो .सब एक जैसे है .मीठे है .‘’
    
       ‘’  कितने तौल दू भाई ?‘’ बूढ़े की मुस्कुराहट से भरे चेहरे को उतरते देख रहे समर से कहता है बुढा .समर भाव सुन चूका है .समर देख रहा है बूढ़े के चेहरे पर उदासी से भरे भाव को.यदाकदा इधर से गुजरते हुए बूढ़े से समर की नजर मिलती रहती है.अबोल की पहचान है उनमें.
        ‘’ 
ले जाओ भाई .उतरता हुआ सीजन है .आठ-दस दिन में सब खत्म हो जायेंगे .‘’चेहरे से गले में उतरती हुई उदासी से आवाज डूबी है.आम के न रहने का गम है ?
       ‘
 एक किलो दे दो.‘’
    
    ‘’ एक किलो से क्या होगा .दो किलो कर दू ?‘’ उदासी की परत निकालता हुआ बोला बुढा 
     
   ‘’एक किलो बहुत है दो बच्चों के लिए .‘’ किसी बड़े निर्णय को सुनाते हुए लगा समर .
       
   बुढा ठेले पर रखें तराजू के दाए हिस्से में मुहँ वाली पतीली में आम रखता है .तौलता है .बाई तरफ सपाट जगह पर मटमैले रंग के बाट रखता है.बाट इतना गन्दा है कि उस पर क्या लिखा है ?पढ़ा नहीं जा सकता है .जो बेहद गन्दा है ,उसीसे तौला जाता है .क्या -क्या तौला जाता हैमुहँ वाली पतीली का पलड़ा झुकता है .आम का वजन  ज्यादा हो गया है .आम कम नहीं करता बुढा और पोलिथिन में डाल देता है .समर कहना चाहता है कि एक किलो से ज्यादा है लेकिन चुप हो जाता है .ज्यादा देने वाले से कहा कौन बोलता है ?नजर बाट पर जाती है समर की.वह नहीं कहता है गन्दा है या कितने  किलो का है?   लेकिन बुढा बोलता है ,‘’धूल-धुआँ है ,फिर आम के हाथ है .बाट को गन्दा होना ही है .‘’समर मुस्कुराता है. लगता है हम गंदों से ही अपनेआपको तुलवाते है.गन्दा वजनदार होता है वही सामने वाले का वजन तय करता है.गंदों के खयाल को छोड़कर बोलता है समर ,‘’ कितने दू ?‘’        ‘’दे दो भाई जो मन करे .‘’
    
      दोनों जानते है कि अभी-अभी सौ रूपये में पाँच किलो दिए है इसलिए भाव मालूम है. समर के दिमाग में यह चल रहा है कि एक किलो कहने और करीब डेढ़किलो तौलने के बाद क्या बुढा बीस रुपये लेगा ?अभी जबकि भाव कम नहीं किये.अगर तीस कहे तो कह दूँगा ,मैंने तो एक किलो का बोला था तो एक किलो के पैसे लो ..और चाहे तो अपने आम कम कर लो .खुद को समझाता है समर .दस -दस केदो नोट निकालते हुए लगता है अब फटे कि तब फटे. नोट गंदे हो जाए तो नोट की हालत खराब हो जाती है लेकिन आदमी गन्दा हो जाये तो उसकी हालत क्यों सुधर जाती है .
    
       नोट को बिना गिने बिना देखे बुढा लकड़ी की छोटी सी पेटी में रखता है.पेटी का ऊपरी हिस्सा ढक्कन का काम करता है .इस पेटी में ताला लटक नहीं सकता है क्योंकि पेटी का सीना सपाट है.पेटी पर हाथ रखते हुए बुढा कहता है ,‘’ बस ..कुछ और दिन है .‘’
     
      पेड़ पर लगे आम के या उसके ..किसके कुछ दिन बचे है ..क्या कहना चाहता है बुढा? समर ने बूढ़े की आँखों में झाँकना चाहा लेकिन वह आँख मिला नहीं पाया .अमराई के नाम पर खड़े कुछ आम की छाया से दूर खापा उखाडने में लगे बच्चों की तरफ नजर डालता है बुढा और आम जमानें में लग जाता है.बड़े-छोटे वाले दो हिस्से में  नहीं कर रहा है .जो ज्यादा पक गये उन्हें अलग करता है और कहता है ,‘’ ये वाले आज खाने लायक है .बाकि एक दिन बाद खाने लायक हो जायेंगे...मीठे है .‘’ पके हुए आम में से एक आम निकालकर देते हुए कहता है .
   
         आम हाथ में लेते हुए समर को लगता है बुढा कुछ और कहना चाहता है.रुकता है समर और आम के पेड़ देखने लगता है जबकि सुनना चाहता है लेकिनकैसे कहू ...हाँ ,तो क्या हुआ बाबासमर चुप है कि लगता है पूछेआम को आम क्यों कहते है ?
     
      आम से बना होगा ‘’आम आदमी ‘’वाला आम .बहुत सारे होने से इस फल को‘’आम ‘’ कहा गया होगा.आम पेट भरने का साधन बना था .भूखा होने पर राह चलते आम तोड़कर खाया जाता होगा .हर आदमी भूखा न रहे इसलिए लगे  होंगे आम .हर आदमी का पेट भरने के लिए किया इंतजाम इसलिए आदमी के साथ आम जोड़कर ‘’ आम आदमी ‘’ कहा गया .हर आम  -ओं -खास को याद रहे ताउम्र कि आदमी के लिए है आम .आम आदमी का आम .
   
         बोलता है बुढा ,‘’मीठे है .ले जाओ .‘’
   
         ‘’नहीं अगली बार ले जाऊंगा .‘’
       
     ‘’अगली बार पता नही बचेंगे ..ले जाओं .‘’आग्रह से भरी है आँखें बूढ़े की.
     
       ‘’ सच कहूँ ..मन तो कर रहा है लेकिन पैसे नहीं मेरे पास .‘’ समर
के मुहँ से हकिकत निकल गई
         
    ‘’ कोई बात नहीं है .उधारी कर लो .’ बूढ़े ने उदारता से कहा .
      
      ‘’ मै उधारी नहीं करता .‘’ समर ने कहा और दिमाग के भीतर चलने लगा उदारता से भरी उधारी सुनने में ही अच्छी लगती है क्योंकि बाद में उसका खामियाजा वह उठा नहीं सकता न आने वाली  पीढ़ी पर ढोल सकता है वह कोई उद्योगपति तो है नहीं कि नहीं चुकाया तो न बदनाम होगा न वसूली होगी .समर को लगा उदारी से भरी उधारी कहीं का नहीं रखेंगी .कहना चाहता था जिसे ताड़ गया बुढा .खामोश लड़के के साथ दोनों चुप हो गये .कि बकरी का बच्चा उछलकूद कर आ गया .पीछे पीछे बकरी भागते हुए आ गई .उदार ,उधार से पैदा हुई चुप्पी
को काले रंग के बकरी के मासूम बच्चें ने उछाल दिया .बकरी के बच्चें में समर को अपना बच्चा नजर आता है जो ख़ामोशी से भरी उदासी को इसी तरह उछाल देता है.
       
      मनमाने ढंग से उछलकूद करते हुए बकरी का बच्चा सड़क पर आ गया .जिसे
रोकने -पकडने के लिए भागता है बुढा.उछलकूद देखकर समर के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है और समर अपनी साईकिल लेकर रवानगी डालता है जबकि बुढा बकरी के बच्चे के पीछे .बूढ़े को लगता है कही एक्सीडेंट न हो जाये. साईकिल चलाते हुए समर को लगता है बुढा उसे आवाज देगा.बूढ़े को सुनाना है और समर को  सुनना है .न समर रुकता है न आवाज आती है .
                  आंगनवाडी कार्यकर्ता ने समर से बेटे के लिए कहा था इसे प्राइवेट स्कूल में डालों.बड़ा होशियार है नए कानून के कारण पढ़ाई का खर्चा सरकार उठायेगी.इसी बात की खुशी के साथ समर अपने बेटे को प्राइवेट स्कूल में नीले राशन कार्ड की फोटोकापी लेकर  जा रहा है .रास्ते में है आम का ठेला है .ठेले के पास बुढा खड़ा है .बुढा देखता है ,मुस्कुराहट के साथ
.समर मुस्कुराता हुआ साईकिल से उतरता है . साईकिल के डंडे पर बैठा हुआ बेटा तपाक से बोलता है पापा आम...वों देखों ..तोडें ?‘’ अत्यधिक उत्साहित होकर बोलता है कि समर और बुढा उसे देखते हुए अपना सारा तनाव उतनी ही तेजी से फेंक देते है .
    
           ‘’स्कूल से आने के बाद .‘’
   
            ‘’ स्कूल क्यों जा रहे ?‘’ सुबह से दसेक बार पूछ चूका है बेटा समर से यही सवाल इतनी ही मासूमियत के साथ .
  
          ‘’ एडमिशन कराने ..‘’
 
           ‘’एडमिशन..क्या होता है पापा ?‘’
 
          ‘’स्कूल में भर्ती करने .मेरा बेटा प्राइवेट स्कूल  जायेगा ...बड़ी स्कूल में .बड़ा आदमी बनेगा ‘’
     
       ‘’आम तोड़ेपापा ..‘’ अमराई में लगे हुए आम को ललचाई निगाह से देखता है बेटा .बेटे को देखता है उम्मीद भरी निगाह से समर .बाप आम खरीद नहीं पाता और बेटा तोडना चाहता है .बेटे को बड़ी स्कूल ..बड़ा आदमी के बजाय आम बड़े दिखते है .लटके हुए आम को देखकर समर को लगता है क्या वह आम है आदमी तो है लेकिन ‘’आम आदमी,‘’  किसी और को कहा जाने लगा है .जिनके बस में है आम वही है आदमी .
          ‘’ स्कूल से आने के बाद तोड़ेंगे आम ..ठीक है .‘’ बुढा कहता है बेटे से कि समर को लगता है बेटे के मन मुताबिक़ पहले आम तोड़े .तोड़े ..बहुत दिनों से कुछ तोडा नहीं .चलाये पत्थर कि हाथ खुल जाये लेकिन बूढ़े के बोलने के बाद समर बेटे को साइकिल पर बैठाता है .
                स्कूल का बड़ा गेट और हलके नीले रंग वाली शर्ट पहने गार्ड को देखकर समर को झिझक सा कुछ लगता है जो उसके दिमाग में दाखिल होता है ,उसे छोडने की कोशिश के साथ इंग्लिश कलर की आलिशान बिल्डिंग में  दाखिल  होता है .गार्ड न रोकता  न पूछ्ता .किधर मिलेगा फार्म समर को सूझ नहीं पडता है .पहले किससे मिलना चाहिए किससे पूछे ?कहाँ एडमिशन की बात करू ?तमाम सवालों के साथ तपती हुई दोपहरी में हरा भरा बगीचा और बोगन बेलिया पर लदे फूल राहत देते है .कोई भी पेड़ फलदार नहीं है .निराश होता है समर कि बाई तरफ अधिकाँश लोग जा रहे है ,उसी तरफ जाता है.
           सरिये वाली जालियों में अलग-अलग कमरें है .पूछ्नें वाला जालियों से बाहर होता है.जेल में कैदियों से मुलाक़ात वाला फ़िल्मी सीन की याद आते ही समर दो खिड़कियों को छोडकर अगली खाली खिडकी में कहता है ,‘’ बच्चें का एडमिशन करना है .‘’
    
      ‘’विच क्लास ‘’ रौबदार आवाज नर्म सी लगी लेकिन समझ में नहीं आया समर को .
    
        ‘’ एडमिशन... एडमिशन इस बेटे का .‘’
  
         ‘’नर्सरी ?‘’
 
            ‘’हाँ‘’
 
            खिडकी के भीतर से वों इशारा करती है ,अगली खिडकी का ,जहाँ लाइन लगी है,दस -बारह लोग है .उनके पीछे खड़ा हो जाता है समर .समर बेटे को देखता है .बेटे के कारण ही इतनी बड़ी बिल्डिंग में खड़ा हू ,बेटा ही मुझे यहाँ लाया है .गर्वित भाव से देखता है बेटे को .
    
लाइन में लगी हुई नज़रों की तरफ जाती है समर की नजर .तो लगता है वे नजरें निकाल रही है समर का एक्स-रे. ‘’.एक्स -रे निकालती नज़रों में नजर डालता है ,तो वे नजरें इधर-उधर तलाश करने लगती है कि अब  किसका एक्स रे निकालना है . खिडकी के भीतर बैठी महिला की आवाज बेहद धीमी गति से आती है ,‘’ ओनली स्पेशल केस कंसीडर..प्लीज यू कांटेक्ट प्रिसिपल मेम..‘’ लोहे की जाली में से आवाज  निकलकर गलियारे में आई और बड़ी जाली से टकराई .गलियारे में बड़ी-बड़ी जालियां है .जाली ही जाली .कितनी महंगी होगी लोहे की जालियांस्कूल में इतनी जालिया समर के अमराई वाले खयाल को कैद कर लेती है .जालियों के भीतर खड़े लोगों के कपड़े ,जूते..सब महंगे लगते है.महंगी-महंगी चीजें पहनकर -लेकर आये है लोग.लाइन में खड़े किसी भी आदमी-औरत  के साथ बच्चा नहीं है .सबके साथ में ,हाथ में मोबाइल है ,महंगे.समर के साथ उसका बेटा है .बेटे के हाथ में समर की ऊँगली है .सरकते हुए खयाल तोडकर कहता है समर बेटे से ,‘’ इस स्कूल में पढ़ेगा मेरा तेजस .पढोगे न बेटा .‘’
         
   बेटा तमाम नजरो को पढ़ चूका है .बेटा नजरो को पढने के बाद जवाब नहीं देता है. गोया की उसने सुना ही नहीं.बेटे के कंधें पर हाथ रखकर समर कहता है ,‘’ क्यों ..क्या हो गया बेटा ?‘’
   
      ‘’कुछ नी .‘’बेटे ने सपाट जवाब दिया .उसके चेहरे को पढ़ पाने में समर ने असमर्थता महसूस की .
     
     लगभग आधे घंटे बाद समर की बारी आती है .समर कहता है ,‘’एडमिशन चाहिए .‘’
   
       ऊँची कुर्सी पर बैठी हुई मैडम समर को देखती है फिर समर के बेटे को.मैडम चुप हो जाती है .लगता है दिमाग उसकी जबान को रोक रहा है .वह लिखने लगती है .जिनकी जबान नही खुलती वे लिखने लग जाते है .समर भी चुप है कि लिखने के बाद बोलेगी .नहीं बोलती क्योंकि वह जानती है इंतजार में खड़े आदमी के लिए चुप्पी कितनी मारक होती है .
            ‘’
फिफ्टीन थाउजेंड ‘’ समर की आँखों में आँख डालकर मैडम कहती
है .जबकि मैडम को कहना था ,तुम्हारी औकात ?
           ‘’.......’
समर की जबान ने जो कहा ,वह मैडम सहित कोई नहीं सुन सका .सब ,सब सुन नहीं सकते है चाहकर भी लेकिन बेटे ने सुन लिया
         
    ‘’पन्दरह हजार .‘’मैडम ने अपने गुस्से को संभालते हुए कहा .
          
  ‘’पन्दरा हजार ....वो मैडम तो फ्री का बोल रही थी .‘’आश्चर्य से कहता है समर .
      
       ‘’ फ्री ...फ्री में नहीं पढ़ाते हम .‘’
       
       ‘’..लेकिन ..‘’
       
      ‘’पढ़ाई हवा नहीं है जो फ्री में मिल जाए .बिजली ,हवा फ्री में मिल रही है ,तो आदत पड़ गई फ्री की .‘’
       
        ‘’आप दे रही है क्या हवा बिजली ..वो आंगनवाडी वाली मैडम ...उन्होंने बोला तो आया हूँ .‘’अपने आपको सयंत करने की कोशिश करता हुआ  बोला समर .
            
  ‘’ अब पानी भी फ्री में नहीं मिलता है ,तो पढ़ाई का कैसे सोचलिया ..सरकारी में जाओ.. प्राइवेट में ही पढ़ाना है ,तो अपने मोहल्ले में पढाओ ..जाओ भाई ..?‘’गुस्से से इकठ्ठा हुआ तनाव बाहर निकाल दिया मैडम ने.
  ‘’ उधर छोटे-छोटे कमरे में लगता है ..अम्बेडकर वैदिक इंग्लिश स्कूल.उसमें नी पढ़ाना.‘’ इंकार से भर गया समर .
          
    ‘’ अम्बेडकर वैदिक इंग्लिश स्कूल...?बढ़िया है .गुड .वेरीगुड .अम्बेडकर भी है .वैदिक भी और इंग्लिश भी .और क्या चाहिए तुम्हें,तुम्हारे अम्बेडकर के अलावा ?‘’ विद्रूपता ,ताना के पैकेज्ड बोतल को समर के ऊपर खाली करते हुए बोली .
            ‘’ 
डॉक्टर अम्बेडकर .डॉक्टर अम्बेडकर तो हम सभी के है मैडम.उन्हीं की बदौलत हम ..आप महिलाये आ रहे है .‘’समर एक साँस में बोल गया.अपने साथ अमराई के आम की मिठास लेकर आया समर को न मीठापन लगता है न हरापन .
            
‘’ये तो नहीं मालुम लेकिन भाईसाब आपकों तो दो के साथ एक फ्री में मिल रहा  है.‘’ लगा सेल्सगर्ल खड़ी हो गई जो हर तरह से समझाना चाह रही है.मैडम तनावमुक्त होने के लिए मजाक उड़ा रही है .
           
   ‘’मैडम हमें पता है वह क्या है वह फ्री में भी नहीं चाहिए..फर्जी है .‘’
          
   ‘’फ्री में नी मिले पढाई .जो फ्री में ले पढ़ाई तो उसका अंगुठा काट लेते थे .याद है न...अब ज़माना बदल गया है .अब अंगूठा मांगेंगे तो...‘’बोलते -बोलते चुप हो गई .अंगूठे से दबा हुआ पेन अपने गरदन की तरफ़ ले गई .मोटी गरदन पर क्रीम पाउडर की चढ़ी हुई परत उमस के कारण इधर-उधर जा रही है .गरदन की बजाय  मोटी किताब दिखी जो तय करती है कि कौन क्या है.इन्हें हर कोई नहीं पढ़ सकता .मोटी किताबें भारी होती है.बहुत भारी .उसके वजन तले दबा होता है दिमाग .
          
  ‘’ ज़माना नहीं बदला मैडम ...अगूंठा काटनेवालों की आदत जाती नहीं ..छोडों मैडम अभी तो मेरे अंगुठे को पढने दो .‘’ पटाक्षेप करता हुआ  बोला समर .
         
  ‘’सीधी सी बात है फ्री में पढ़ाना है तो वही पडौस में पढ़ाना पड़ेगा .बड़ी स्कूल के सपने मत देखों .‘’ उसने नैपकिन अपनी गरदन से लगाते हुए कहा .
           
 ‘’यहाँ ..‘’ समर के बोलते ही बात काटते हुए मैडम ने कहा,‘’यहाँ फ्री में नहीं पढ़ाते है..समझ में नहीं आ रहा है कब से समझा रही हू यहाँ नहीं होगा एडमिशन. फ्री में समझा रही हू फिर भी ..‘’ गरदन से परत निकलने के कारण चिल्लानें लगी .उपहास उडाता मैडम का चेहरा सख्त हुआ.
           
  ‘’सुन लिया समझ लिया मैडम .फिर वो मैडम कैसे बोल रही थी .‘’ समर की जबान तल्ख हो गई.
       
     ‘’वो भला मैडम में मैडम है ?एक मामूली सी कार्यकर्ता ...जाओं ..उसी के पास जाओं..उसी से लो फ्री में ..‘’ऊँची कुर्सी से उतारकर खिडकी के पास आकर बोली मैडम .
           ‘’
ये कोई बोलने का तरीका है ?इस तरह बातें करते है आप लोग .‘’समर ने खुद को शांत रखते हुए कहा.
        
    ‘’फ्री वालों के लिए फ्री वाला तरीका ..ओके ..गो .यू डोंटवेस्ट माय वैलुएबल टाइम..‘’अपनी साड़ी में आये सिलवटों को ठीक करते हुए कहा मैडम ने. दिमाग के भीतर की सिलवटे बढती जा रही है .
      
     ‘’ नया कानून आया  है बच्चों को फ्री में पढाने का ..‘’ समर के भीतर साहस आया.समर का चेहरा जाली के पास आ गया .
       
    ‘’वो कानून है एडमिशन नहीं दिया तो हमें फांसी पर चढाओंगे?जेल में ...कानून ..जाओं ‘’बोलने के बाद कुर्सी पर बैठी और  समर के पीछे खड़े व्यक्ति से कहा ,‘’प्लीज आप आइये .‘’
       
      ‘’अगली बार कानून के साथ आऊंगा ..‘’समर ने कहा . बेटा सहमी हुई नजर से देखता है तो समर  मजबूती से हाथ पकड़कर अहसास दिलाता है कि अभी कुछ नही बिगडा .बेटे को लेकर आगे बढ़ा.
            
   स्कूल के सामने स्टेशनरी ,गणवेश की दुकान के अलावा जनरल स्टोर्स की दुकान से लगी हुई फल वाले की दुकान है ,जिसमें सजे है कई तरह के आम.समर बेटे को देखता है. तेजस देखता है आम ,पपीता लेकिन न मचलता है न बोलता है .सजी हुई दुकान को देखता है तेजस.बेटे की उदासी को देखकर कहता है समर ,कुछ चाहिए बेटा ?जवाब नहीं देता है तेजस . समर  रुकना नहींचाहता है .अभी अभी बड़ी दुकान से होकर आया है .चुप और उदास बेटे से कहता है समर ,‘’ तेजस आम की इस बड़ी दुकान में नहीं है ताजे आम .हम पेड़ से तोड़कर खायेंगे आम .”’ तेजस दुकान को अनदेखा करता हुआ आगे बढ़ जाता है और कहता है ,‘’ आम तोड़ेंगे हम ..‘’तेजस नए लक्ष्य की तरफ बढ़ता दिखा तो समर उसे देखता रहा .
                              
 साईकिल चलाने में दिक्कत आ रही है समर को . लगता है ताकत नही बची. धूप का असर लगता है ,सोचता है तो  याद आता है कि आयलिंग नहीं करवाई थी ..कि पहिये में हवा कम है .हाँ ,हवा कम है .टायर पिचके हुए दिख रहे है.उत्साह ,उमंग की सारी हवा निकाल दी  मैडम ने  जिसे आंगनवाड़ी की कार्यकर्ता ने भरी थी .समर ने कभी नहीं सोचा था कि वह अपने बेटे को इस स्कूल  में पढ़ा सकेगा लेकिन शिक्षा ग्यारंटी कानून ने भरोसा दिलाया कि उसका बच्चा भी इसमें पढ़ सकेगा लेकिन उस मैडम ने घर का रास्ता दिखा दिया .कभी साईकिल को तो कभी सड़क को देखता है समर .कभी बेटे को तो कभी  सूरज को .आंगनवाडी की मैडम का भरोसा तो कभी स्कूल की मैडम की प्रताडना के साथ चलता है कि उसे चलना है .
   
             अमराई पहुचते ही बेटा चिल्लाता है ,‘’पापाबकरी...बकरीपापा...‘’साईकिल से कूदकर भागना चाहता है बेटा.तेजस की खामोशी अब टूटी कि जालियों की कैद से छुटा हो.वह इस कदर उत्साहित होता है कि उसने संसार का कोई विशिष्ट जीव देखा हो .बेटा पहली बार देखता है आज़ाद बकरी को उछलकूद करती बकरी को .उतारकर बेटे को साईकिल ठेले के पास खड़ी करता है.
    
          बेटा फिर कहता है ,‘’बकरीपापा...पकडें ...पापाबकरी...पापाबकरी...‘’तेजस की बात आम के पत्ते -सी भाले के जैसी नुकीली लगी ,जो अपने हरेपन के साथ थी .
               चार-छह बकरी के बच्चों  को देखकर चिल्लाता हुआ भाग रहा है कि उसके पीछे -पीछे समर ...बुढा भी आ जाता है .जैसी ही बकरी का बच्चा उछलता हुआ भागता है तेजस समर के पास आ जाता है .अनपेक्षित सा लगा तेजस को चलता-भागता हुआ बकरी का बच्चा कैसे उछलता है ?जबकि समर के बचे हुए उत्साह पर ‘’पापाबकरी ‘’ भारी पड़ गया.पापा और बकरी में भेद नही किया.तेजस को पापा में बकरी नजर आई या बकरी में पापा .बेटे ने पापा और बकरी  को एक कर फैसला सुना दिया कि अब समर का क्या होगा हँस नहीं पाया समर .समर को अपनी गरदन नजर आने लगी तो  बूढ़े को देखा .बूढ़े का पाजामा ऊँचा है ,थ्रीफोर से थोडा लंबा .कुरता भी छोटा है .बूढ़े ने जानबूझकर छोटा सिलवाया है या इनके भाई का होगा ?
      
       स्कूल ,मैडम फिर बकरीपापा के शब्दों से लड़ता हुआ समर पूछता है ,‘’इतने सारे आम कैसे तोडते हो ?‘’ समर को इस तरह बोलते हुए लगा कि एकसाथ बहुतों को तोडना है कि टपकाना है .
    
       ‘’ हवा रात में ढेर सारे आम टपका देती है .बाकि हेकड़ी से तोड़ लेते है हम .‘’ बांस के मुहँ पर कपड़े की थैली दिखाते हुए कहता जाता है बुढा ,‘’ सुबे-सुबे जो गिर जाते है उनको उठाकर इकठठा करते है .फिर हरेक पेड़ को देखते है कौनसा आम पक गया ..पकने वाला है .‘’बूढ़े का चेहरा खुरदरा है जो मटमैला सा है .आम की छाल की जगह बुढा दिखा.
       
       बूढ़े ने कहा ,‘’आम तो झाबुआ-अलीराजपुर के होते है ..बड़े -बड़े एक आम चार किलो का ..नूरजहाँ ,शाहजहाँ ..श्रीदेवी नाम से ..वहाँ तो बाटली,गधामार,रशियाकेशर,रंगराज,,राजापरी फकिरवाला ,सिंदूरी ,दशहरी ,लंगड़ा,नीलमपरी ,तोतापरी ,बादाम ,करेला ,सफेदा,दाडम,रूमानी,बाम्बेग्रीन,मकाराम...और भी नाम के आम है ..हाँ वनराज तीन रंगों में आता है हरा ,पीला और लाल ..चालीस से ज्यादा किस्म है .. सड़क के दोनों तरफ,जहा देखो वही आम.आम ही आम .सबसे बड़ा आम चार किलो से ज्यादा का ,कठ्ठीवाडा में होता है.सबसे ज्यादा बारिश वही होती है .वही काजू  भी है.आम काजू के परिवार का है ..काजू समझ कर आम खाकर पेट भरते है.‘’ हँसने लगा बुढा कि कुछ ज्यादा  ही बोल दिया हो .
   
      ‘’ वहाँ इतने बड़े आम कहाँ से आये होंगे ?‘’
     
     ‘’ पुराने लोग बताते है ..गुजरात से लाये थे .‘’ बूढ़े कहता है और तभी तेजस तेजी से कहता है , ‘’ पापाआम ...आमपापा...तोड़े ..कहा था ..यादहै ..तोड़े ..बोला था,तोडना है .तोड़े तेजस बकरी के बच्चे को पकड़ने की बजाय आम तोड़ने पर आ गया .तोड़ने के इरादे से लबालब भरा है तेजस .तोडना है .तोडना है ,क्या तोडना है ?
     
     स्कूल ...या  आम गिरे हुए की बजाय लटके हुए को तोडना है .कैसे तोडूंगा ?तोड़ने का तरीका बुढा बता चूका है .क्या वही तरीका है ?  हेकड़ी से ?समर सोचते हुए चल रहा है खेत में.आम के आसपास वाली जमीन छोडकर फसल बोई जाती है .फसल कटाई के बाद दराती से काटे हुए पौधों के बीच चल रहे है बिना सवाल जवाब ,प्रतिरोध ,सहमती के .चलने में दिक्कत आ रही है.बाई तरफ घनी छाया में दूसरे वृक्ष के बीच खटिया है ..वही झोपडी है.कुआ और बुढिया दिखती है. समर देखता है तेजस को कही ये कुआपापा ..पापाकुआ ..तो नहीं बोलेगा तेजस बुढिया को देखता है फिर आम को .आम तोडना है जबकि समर तय नहीं कर पाया कैसे तोडूंगा आम ?फिर भी चल रहा है .
     
     ‘’ नाना थारा पग म खापो भरीई जाएगो .देखि नी जाजो.‘’ तपती हुई दोपहरी में घने पेड़ से गुजरकर आती हवा की तरह घूँघट में से बुढिया बोली तो देखता ही रह गया समर .बुढिया ने तेजस की तरफ देखते हुए कहा .समर को खापा का नुकीलापन तब दिखा जब दिखाया गया.समर ने  बेटे को गोद में उठा लिया .अमराई के खाली हिस्से में बोये हुए अमेरिकन भुट्टे के खापा को देखकर. बाकि हिस्से में हल से खापा को जमीन से उखाड़ने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है .मजदूर नहीं मिल रहे है .अमराई में चाहकर भी ट्रेक्टर से बखरने का काम नहीं किया जा सकता है .पेड़ ही पेड़ है .पेड़ में आम गिनेचुने लगे हुए है .जिस पेड़ के सामने बुढा रुका ,उस पेड़ की डंगाल धरती को छूने के लिए लालायित है .समर के कंधे से  तेजस आसानी से आम तोड़ सकता है .समर कहता है तेजस से ,‘’तोड़ ..आम तोडना है न ..तोड़ .‘’
     
      ‘’ नहीं ..नहीं तोडना .‘’ इंकार भरे शब्द कहता है तेजस और आम को   इस तरह स्पर्श करता है कि आम के ओंठ हो .
           ‘’ आम तोडना था न ..तोड़ ..‘’ समर समझाता है .
   
          ‘’ तोड़ लो मियां वरना आम टपक जायेगे.बस चारेक दिन में सब टपक जायेंगे .‘’ बुढा कहता है .
      
        इतने निकट से देखने और छूने  के बाद आम तोड़ने से मना करता है तेजस .बूढ़े का दिल भर आता है कि समर बेटे को उकसाता है ,‘’तोड़ ..तोड़ ..‘’
    
        ‘’ मेरको नी तोडना .‘’ उदासी में लटक गया तेजस का चेहरा .लटकते आम  को देखने की बजाय बेटे को देखते हुए समर बोला ,‘’ तुम ही तो कह रहे थे,आम तोडना है ..फिर अब..अब क्या हो गया ?‘’
      
     ‘’छोडों जी बच्चा नहीं तोडना चाहता है तो क्यों मजबूर कर रहे हो.‘’ मासूमियत से कहता है बुढा .
          ‘’ मै तोडू ..हटो ..मै तोड़ता हूँ .‘’ समर बेटे को गोद में से उतारते हुए कहता है .
 
          ‘’ आप भी मत तोडों ..‘’ तेजस बोलता है तो वही का वही खड़ा हो जाता है समर .
           ‘’  चलो नी तोड़ते है .वहाँ बैठते है .‘’ झोपडी की तरफ इशारा करते हुए बुढा बोलता है और समर चल देता है बेटे को गोद में उठाकर .
  
           झोपडी में से आम लाता है बुढा .‘’ चिक साफ़ कर देना .‘’समर को आम देते हुए कहता है बुढा .समर आम के हरे पत्तों से साफ़ करने की कोशिश करता है .असफल होता देख बुढा कहता है ,‘’लाओ ..मै साफ़ करता हू ..‘’ ले लेता है आम और जरमन के बड़े से लोटे के पानी से धोकर अपने कुर्ते से साफ कर तेजस को आम देता है बुढा .ना नुकर के बाद ले लेता है आम तेजस .
    
      ‘’ चार दिन में सब टपक जायेंगे ..मतलब ?‘’समर संशयग्रस्त सवाल करता है .
   
       ‘’ जिस तरह का मौसम बन रहा है ,ये मौसम आम को रहने नहीं देगा .सबकों टपका देगा.सबकों  .‘’भय जैसी हलकी परत आती है चेहरे पर .जिसे अपने उपर हावी नहीं होने की कोशिश करते हुए बुढा कहता है ,‘’पिछले हफ्ते तक तो साग इकठ्ठी कर लेते थे ..अब बाकि पक गये पेड़ पर ..‘’ चुप हो जाता है बुढा कि आती हुई आंधी का  अहसास हो चुका हो .
      ‘’ आम तो पकाते है .है ना ‘’ समर सवाल कर जवाब परोसता है .
 
        ‘’ साग को रात भर रखो वह अपने आप पक जाती है .कार्बेट या दीगर चीजों से आम नहीं पकाते है हम .जैसा है वैसा ही बेचते है .‘’
    
    ‘’  आम को नंगा नहीं देखा कभी .बिना पत्तों का .पतझड़ नहीं आता है?‘’ समर वातावरण को सामान्य करने के लिए कहता है .
      
    ‘’ आम के सारे पत्ते एक साथ झडते नहीं .गिरते है टुकड़ों में . नए आ जाते है तो पता ही नहीं चलता है कि पत्ते पुराने होकर झाड़ से जुदा हो गये है.‘’  बुढा बोला तो लगा उदासी का कोई पेड़ बोल रहा हो.
   
    ‘ आम नंगा हो जाए तो ....‘’ समर के दिमाग में अभी भी स्कूल में मैडम की बाते  और व्यवहार है .
   
    ‘’ तो समझ लेना दीमक लग गई या कीड़ा ...तभी .‘’
  
     ‘’ आदमी को दीमक नहीं लगती ...‘’ समर खुद को समझने के लिए बोला .
         ‘’  जिन्हें लगती है उन्हें नहीं दिखती ..‘’ बुढा ऐसी हँसी हंसता है जिसके तल  उदासी बैठी हो .बुढा अमराई देखता है जो नाम की राह गई .पुराने पेड़ लगातार कम होते जा रहे है ,आम के नए पौधे लगा नहीं रहे  है .खेती लायक हो गई अमराई जिसमें बोये हुए बेमौसम के मक्के के खापा है .समर को अमराई में स्कूल लगता है जहाँ ढेर खापा है,नुकीले ,तेज वही तेजस को पढ़ाने की हसरत है .समर को अमराई में आम से ज्यादा खापा नजर आने लगे .
  
       ‘’ अब तो बहुत कम रह गये आम के झाड़ .‘’ बातचीत बनाये रखने के लिए कहता है समर .
     
           ‘’ हा ...बच्चे का एडमिशन हो गया ?‘’
   
          ‘’ नहीं .वों ..‘’ समर का जवाब पूरा होने से पहले ही पसीने से लथपथ तेजस ने   कहा ,‘’बकरी ले लो पापा .‘’
  
         ‘’ बकरी ..? ‘’स्कूल की बातों को बकरी तोडती है .
   
         ‘’ पापाबकरी  ले लो ‘’जिद पर आ गया बेटा .
 
            ‘’ कहाँ रखेंगे ?‘’ समर समझाने के लिए बोलता है .
             ‘’ अपने घर में रखेंगे .ठीक है .‘’ तेजस समर के गले में हाथ डालकर निर्णय देता  है.
   
          ‘’ ऐसे नहीं ले जाते है .खरीदना पड़ती है .‘’ समर कहता है .
    
        ‘’तो खरीद लो .‘’ मासूमियत से भरकर गोद में बैठ जाता है तेजस .
  
            ‘’ आम ..‘’विषयान्तर करता है समर आम दिखाते हुए .
   
          ‘’बकरीपापा ..बकरीपापा ..‘’ नहीं समझा पा रहा समर.समर अभी भी स्कूल में लटका हुआ है .लटका हुआ समर कहता है ,‘’शेर ..शेर खरीद ले.‘’
   
       ‘’ शेर नी चाहिए ...बकरीपापा ..‘’ तेजस डर को भगाता हुआ बोलता है. बूढ़े ने खेत में पड़ी हुई कटी हुई फसल के बिखरे हुए अवशेष जिसे खापा कहते है ,को हटाकर अपने दोनों हाथों के पंजे हिलाए और चेहरे के भाव बदल कर खर्राश भरी आवाज में कहा ,‘’ शेर ..‘’
     
 ‘’ शेर मत खरीदना पापा .तेजस ने डरकर कहा. उसे सीने से लगाया समर ने .
    
  ‘’ शेर बचे ही नहीं .फिर कैसे खरीदेंगे तुम्हारे पापा .‘’ बूढ़े को लगा बच्चे को समझाए .
    
      ‘’शेर खरीदते नहीं बेटा .जंगल नहीं इसलिए शेर भी नहीं है .जो शेर बनते है वों खाल पहनकर डराते है शब्दों से .‘’ समर बोलता रहा लेकिन सीने से चिपका रहा बेटा .
   
      ‘’अल्फाजों में नहीं रहा डर .डर है पुराने वक्त का ,पुराने जख्मों का ..जख्म भरने भी नहीं देते ..छोडिये ..आम खिलाइए बेटे को ..आप पना लेंगे या आम ?‘’ बुढा बोला तो लगा वक्त के साथ वह अपने बच्चों को याद कर रहा है .कच्चे आम को भूनकर बनता है पना जो लू लगने नहीं देता . बुढा लू से बचाना चाहता है समर को .
  
        ‘’अभी जख्म लेकर आया हू स्कूल से .पता नहीं बच्चा भूल पायेगा या नहीं ..‘’समर ने कहा . कहते है लोग आसानी से मिल जाता है आम और स्कूल लेकिन समर को लगा उसके बस में न आम है न स्कूल .
 
         ‘’ पापाबकरी ..‘’ फिर बोला तेजस कि स्कूल से लेना देना नहीं हो  .
         ‘’ बकरी भाग गई तो ...‘’समर हँसने की खातिर कहता है .
   
      ‘’ बाँधकर रखेंगे .फिर नी भागेगी .ठीक है .‘’बेटे के पास तरकीब है .
         ‘’बेटा ..पापा के पास पैसे नी है .इसलिए बकरी खरीद नी सकते है .‘’ समर के चेहरे पर सपाटता के साथ सूनापन आ गया है .
   
        ‘’ बिना पैसे की खरीदेंगे पापा .‘’
  
          ‘’बिना पैसे के कुछ भी खरीद नहीं सकते ..न मिल सकता एडमिशन .‘’ जख्म ,हकिकत में शब्दों में उतर गये .
 
        ‘ तो पकड़ लेते है ...बकरीपापा.‘’ जैसे नई तरकीब आई और उल्लास लाई तेजस में .
 
        ‘ जान ले लेंगे चाचा ..‘’ डराता है समर .
 
       ‘’दे देना चचा को जान .ठीक है .‘’ निष्कर्ष स्वरूप समझाते हुए कहता है तेजस .
        ‘’ फिर बकरी के साथ तू रहना ...बिना पापा के .‘’ समर भावनात्मक हथियार रखता है ताकि बकरी की बात खत्म हो वरना दिन रात यही जिद चलती रहेगी .घर पर जीना मुहाल कर देगा तेजस .उसे हर हाल में सहमत कराना है कि क्यों नहीं खरीद सकते बकरी को  .समर को अहसास है कि वह बहुत देर से अमराई में है .कि तेजस की जिद को यहीं छोड जाने की जदोजेहद से गुजर रहा है .
     
     ‘’ एक ही मिलेगा .पापा या बकरी .दूसरे की तो जान ही  जानी ही है बेटा .‘’समर की जान निकलती जा रही है .कैसे समझाए ?सपने देखने की कोशिश में जान पर बन आई है.तेजस चुप हो गया .वह इसके मायने समझने में लग गया जबकि  समर जाने के लिए खड़ा हुआ.चलते हुए समर ने बेटे से कहा ,‘’ बकरी का क्या करोंगे .‘’
  
        ‘’...मस्ती करूँगा ,खेलूंगा .‘’ चमकती हुई आँखे बड़ी हुई तेजस की .
        ‘’मेरे साथ मस्ती करोंगे?मै बनता हू बकरी .‘’ हंसते हुए कहा बूढ़े ने . तेजस ने अविश्वास के साथ देखा बूढ़े को
       
     हवा तेज हो गई .धूल से भरी हुई .मौसम बनाने वाली हवा .वातावरण बनाने में हवा के साथ धूल चलती है .आकाश में बादलों का छितरा हुआ झुंड ने उजाले को किनारे कियाउजाला तीखी धूप दे रहा है .वह पसीने के साथ बदन भी जलाता और गला भी सूखाता है.इस उजाले का क्या मतलब काले बादल जरुरी है .जरुरी है बरसात ,मौसम में बराबरी के लिए.इतना तीखा उजाला नहीं चाहिए .समर सोचता हुआ बूढ़े को देखता है.तेजस खापा पकडता है ,जिसे जमीन में से निकालकर रखा गया है .खेत के कुछ हिस्से में खापा नहीं निकाले गये है.समर की नजर को देखकर कहता है बुढा ,‘’ खापा को  मजूर ही निकाल सकते है.यहाँ ट्रेक्टर नहीं चल सकता है .जगह देखकर समझकर ही ट्रेक्टर चलाया जा सकता है .‘’
      
   बूढ़े के खेत में ,बूढ़े की अमराई में ,खापा देखता है .पैर में घुस न जाने की हिदायत की याद के साथ उस नुकीले हिस्से की पोली हो चुकी सूखी हुई डंडी को पकड़ता है .जड़ में मिट्टी लगी हुई है .बुढा  उत्सुकता में है. समर को अपने हाथ में खापा की बजाय लटका हुआ स्कूल दिखता है.बूढ़े को क्या दिख रहा होगा समर मिट्टी से भरा खापा मारता है ,तेज हवा से घबराये पेड़ पर .सूखी हुई मिट्टी पेड़ की बजाय अपनी जमीन से मिलने के लिए बिखरती हुई आ  रही है .खापा से जकड़ी हुई मिट्टी आम की चाह में पत्तियों से टकराती हुई तने पर दम तोड़ देती है .
        
      बुढा  उदास होता हुआ कहता है,‘’इस अमेरिकन की मिठास ने देशी भुट्टो को कही का नहीं रखा है.‘’ समर को लगा कि बुढा कह रहा हो कि उसे भी कहीं का नहीं रखा गया है. ,‘’. हमें कहीं का नहीं रखा है .अगले जन्म की चिंता का डर दिखा दिखाकर सदियों से पूजापाठ की मिठास से बेसुध कर रखा है.हमें होश कब आयेगा ?कब खुद पर भरोसा कर हकिकत समझेंगे ..कब उनके बीज  हमारी धरती को और ये लोग हमें बंजर बनाने में लगे हुए है.बंजर नहीं हुए हम .हम बंजर नहीं हो सकते है . अमेरिकन भुट्टे से लेकर मोटी किताबों की मिठास का जहर पहचानना होगा.हमें पूजा पाठ ,पाप पुण्य का डर छोड़ना होगा .पढ़ाना होगा बच्चों को .अधिकार है पढ़ना .अधिकार .अधिकार न मिले तो ..‘’  समर तय कर चुका है कि तेजस को उसी  स्कूल में पढाकर ही रहूँगा.इसके लिए जो भी करना हो करूँगा.बोलते-बोलते समर ने खापा उठाया.खापा से खेत की मिट्टी पूरी तरह से दूर नही हुई है.
        
  ‘’ तोड़ दो पापा ..‘’ तेजस नारे की तरह बोलता है.उसकी आँखों में चमक है. समर को अहसास हो चुका है कि अब तोडना ही पड़ेंगा .बेटे के दिमाग में आम है या स्कूल ..मैडम .बेटे से कुछ न कहकर खापा देखकर बूढ़े से पूछता है समर ,‘’ इसका क्या करोगे ?‘’
      
   ‘’ हम तो इस अमेरिकन को जलाते है .इस दफे लेट हो गये है .ज्यादा लेट .‘’ बुढा मुस्कुराता है.खापा पकड़कर ,गोया किसी अपराधी को पकड़ा हो .
      
     स्कूल और मैडम समझकर खापा उठाता है समर और कहता है ,‘’ इसका तो
भूसा बनाना बेहतर होगा .‘’
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नोट - खापा, फसल काटने के बाद पौधे का नुकीला हिस्सा जो खेत में रह जाता है .


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शुक्रवार साहित्य वार्षिकी  2013में प्रकाशित